"आध्यात्मिक ज्ञान से बनेगा दहेज मुक्त भारत"
"आध्यात्मिक ज्ञान से ही दहेज मुक्त भारत बनेगा।"
प्राचीन काल में राजा लोग अपनी बेटियों को हाथी, घोड़े ,सोने चांदी हीरे मोती आदि जेवरात दिया करते थे क्योंकि राजाओं के पास अथाह संपत्ति हुआ करती थी। इसलिये वह अपनी बेटियों को उनकी शादियों के समय अधिक धन देकर भेजा करते थे ।
धीरे-धीरे इस प्रथा ने परंपरा का रूप ले लिया वर्तमान समय में हर पिता को अपनी बेटी की शादी में दहेज देना पड़ता है अब पिता गरीब हो या अमीर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि लड़के वाले तो मुंह खोलकर बहुत महंगी महंगी वस्तुओ की मांग करते हैं । और बेचारे गरीब पिता को उनकी मांगों को मानना भी पड़ता है इसके लिए उसे अपनी जमीन जायदाद यहां तक की कई बार तो अपने घर भी गिरवी रखना पड़ता हैं। वह जीवन भर कर्जे में रहकर अपनी एक बेटी की शादी करता है क्योंकि वह समाज में चली आ रही परंपरा को नहीं तोड़ना चाहता या फिर समाज उसे इस परंपरा से बाहर नहीं निकलने दे रहा है ।
परंतु वर्तमान समय में एक ऐसे संत धरती पर मौजूद है। जिनके अनुयाई आडंबर रहित बिना दहेज की मात्र 17 मिनट में परमात्मा की रमैंणी द्वारा शादी करते हैं इस शादी में कोई भी बाह्य आडंबर नहीं होता है और ना ही यह शादी बहुत अधिक खर्चीली होती है ।
इस शादी का खर्च बहुत कम होता है ।
कुछ ही रुपयों में शादी संपन्न हो जाती है। जिससे लड़की के पिता पर अधिक बोझ नहीं पड़ता ।और वह खुशी से अपनी बेटी की शादी करता है ।
संत रामपाल जी महाराज वही संत है जिन्होंने दहेज रूपी दानव को समाज से खत्म करने का बीड़ा उठाया है ।और उनके कई अनुयायियों ने इसकी समाज में मिसाल भी पेश की है ।
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा जो शादी होती है उसमें ना ही किसी प्रकार का दहेज लिया जाता है इन शादियों में कोई नशा आदि जी नहीं किया जाता है। यह शादियां पूरी तरह एक समाज एक सभ्य समाज के लिए हितकर है।
प्राचीन काल में राजा लोग अपनी बेटियों को हाथी, घोड़े ,सोने चांदी हीरे मोती आदि जेवरात दिया करते थे क्योंकि राजाओं के पास अथाह संपत्ति हुआ करती थी। इसलिये वह अपनी बेटियों को उनकी शादियों के समय अधिक धन देकर भेजा करते थे ।
धीरे-धीरे इस प्रथा ने परंपरा का रूप ले लिया वर्तमान समय में हर पिता को अपनी बेटी की शादी में दहेज देना पड़ता है अब पिता गरीब हो या अमीर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि लड़के वाले तो मुंह खोलकर बहुत महंगी महंगी वस्तुओ की मांग करते हैं । और बेचारे गरीब पिता को उनकी मांगों को मानना भी पड़ता है इसके लिए उसे अपनी जमीन जायदाद यहां तक की कई बार तो अपने घर भी गिरवी रखना पड़ता हैं। वह जीवन भर कर्जे में रहकर अपनी एक बेटी की शादी करता है क्योंकि वह समाज में चली आ रही परंपरा को नहीं तोड़ना चाहता या फिर समाज उसे इस परंपरा से बाहर नहीं निकलने दे रहा है ।
परंतु वर्तमान समय में एक ऐसे संत धरती पर मौजूद है। जिनके अनुयाई आडंबर रहित बिना दहेज की मात्र 17 मिनट में परमात्मा की रमैंणी द्वारा शादी करते हैं इस शादी में कोई भी बाह्य आडंबर नहीं होता है और ना ही यह शादी बहुत अधिक खर्चीली होती है ।
इस शादी का खर्च बहुत कम होता है ।
कुछ ही रुपयों में शादी संपन्न हो जाती है। जिससे लड़की के पिता पर अधिक बोझ नहीं पड़ता ।और वह खुशी से अपनी बेटी की शादी करता है ।
संत रामपाल जी महाराज वही संत है जिन्होंने दहेज रूपी दानव को समाज से खत्म करने का बीड़ा उठाया है ।और उनके कई अनुयायियों ने इसकी समाज में मिसाल भी पेश की है ।
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा जो शादी होती है उसमें ना ही किसी प्रकार का दहेज लिया जाता है इन शादियों में कोई नशा आदि जी नहीं किया जाता है। यह शादियां पूरी तरह एक समाज एक सभ्य समाज के लिए हितकर है।
संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान अनुसार समाज में सुधार आ रहा है और जिन बेटियों को समाज में सिर्फ दहेज के लिए मारा पीटा प्रताड़ित किया जाता था यहां तक की कई लड़कियों को तो दहेज के लिए जिंदा भी जलाया जाता है उन सभी दहेज रूपी दानव के लिए संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है अगर आप भी संत रामपाल जी महाराज के बारे में जानना चाहते हैं तो अवश्य मंगवाई है यह पुस्तक👇👇👇
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Right ji
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