"आध्यात्मिक ज्ञान से बनेगा दहेज मुक्त भारत"
"आध्यात्मिक ज्ञान से ही दहेज मुक्त भारत बनेगा।" प्राचीन काल में राजा लोग अपनी बेटियों को हाथी, घोड़े ,सोने चांदी हीरे मोती आदि जेवरात दिया करते थे क्योंकि राजाओं के पास अथाह संपत्ति हुआ करती थी। इसलिये वह अपनी बेटियों को उनकी शादियों के समय अधिक धन देकर भेजा करते थे । धीरे-धीरे इस प्रथा ने परंपरा का रूप ले लिया वर्तमान समय में हर पिता को अपनी बेटी की शादी में दहेज देना पड़ता है अब पिता गरीब हो या अमीर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि लड़के वाले तो मुंह खोलकर बहुत महंगी महंगी वस्तुओ की मांग करते हैं । और बेचारे गरीब पिता को उनकी मांगों को मानना भी पड़ता है इसके लिए उसे अपनी जमीन जायदाद यहां तक की कई बार तो अपने घर भी गिरवी रखना पड़ता हैं। वह जीवन भर कर्जे में रहकर अपनी एक बेटी की शादी करता है क्योंकि वह समाज में चली आ रही परंपरा को नहीं तोड़ना चाहता या फिर समाज उसे इस परंपरा से बाहर नहीं निकलने दे रहा है । परंतु वर्तमान समय में एक ऐसे संत धरती पर मौजूद है। जिनके अनुयाई आडंबर रहित बिना दहेज की मात्र 17 मिनट ...